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एक दुसरे से जुदा हो जाएगी.....

बैतूल (रामकिशोर पंवार): आज एक बार फिर विज्ञान भगवान द्वारा रचित विधि के विधान को चुनौती देने जा रहा है लेकिन विज्ञान उस भगवान से दुआ भी मांग रहा है कि वह उसके प्रयासो पर पानी न फेरते हुए उसे सफल सिद्ध करे ताकि वह उन दो जुड़वा बेटियो को आपस में एक दुसरे से अलग कर सके। परमेश्वर से दुआ करने के लिए देश - विदेश से आए सभी चिकित्सको ने सामुहिक रूप से भगवान के विधान को परिवर्तित करने से पहले प्रार्थना की और उससे निवेदन किया कि वह उन दोनो बहनो को अपनी मां से गले मिलने के लिए अलग - अलग कर दे। बुधवार को सुबह आठ बजे से एक जिस्म दो जान बनी दुनियां की अजीबो - गरीब परिस्थितियों की जन्मदात्री बनी दो मासुम बेटिया भी अपनी उस बेसहाय दुखयारी मां के पल्लू को पकडऩे को बेताब है। जन्म देते समय प्रसव पीड़ा को सहन कर चुकी मां को आंचल एक बार फिर भर आया है तथा उसे अभी से अनजान पीड़ा होने लगी है। यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं बल्कि एक ऐसी कहानी है जो आज सुबह से लिखी जा रही है। बुधवार 20 जून को सुबह 8 बजे से यह ऑपरेशन शुरू होगा। इस हाईरिस्क ऑपरेशन के विषय में यह कहना मुश्किल है कि ऑपरेशन कितनी देर चलेगा और क्या परिणाम होगा। दोनों बच्चियों की बीते सोमवार को विशेष रूप से जांच की गई और ऑपरेशन के पहले उपचार किया गया। जानकारी क अनुसार उनका बीपी, ब्लड प्रेशर, टेम्परेचर, ब्लड आदि की जांच की गई। बताया गया कि ऑपरेशन के बाद इन्हें वेंटीलेटर पर रखा जाएगा। डॉ अलब्रड शून इस तरह के ऑपरेशन पहले भी कर चुके हैं। उनका कहना था कि ऑपरेशन के बाद चौबीस घंटे इन्हें विशेष निगरानी में रखा जाएगा। पाढर चिकित्सालय का ऑपरेशन थियेटर इस विशेष ऑपरेशन के लिए पूरी तरह से तैयार है। ऑपरेशन के लिए जर्मनी से वेंटीलेटर, एनेस्थिसिया मशीन, मॉनीटर, इंफ्यूजन पंप सहित दवाईयां मंगवाई गई है। डॉक्टरों की टीम में आस्ट्रेलिया से लीवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ अलब्रड शून, डॉ गार्डन थामस, एनेस्थिसिया डॉ डेविड बेंस , शिशु रोग विशेषज्ञ लुधियाना से डॉ हेपसिबा, हैदराबाद से डॉ विभा नाईक आ चुके हैं। इसके अलावा डॉ रमिया, डॉ अनिल, डॉ एबोट बेलोर तमिलनायडू भी आ चुके हैं। सफल ऑपरेशन के लिए हर तरह के इंतजाम किए हैं लोगों की दुआएं भी इन बच्चियों के साथ हंै, जो विशेषज्ञ डॉक्टर इन बच्चियों का ऑपरेशन करेंगे उन्हें लोगों से रूबरू भी करा रहे हैं। यह सभी डॉक्टर नि:शुल्क सेवाएं दे रहे हैं। नियति और विज्ञान के बीच की जद्दोजहद की एक बानगी पाढर में बुधवार को देखने को मिलेगी। जन्म के बाद से ही एक जिस्म और दो जान की तरह रही एक दूसरे से जुड़ी दो मासूम परियों के जुदा होने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। अगले चौबीस घंटे में आला डॉक्टरों की एक टीम पाढर अस्पताल में इस हाईरिस्की ऑपरेशन में जुट जाएगी। यह मेडिकल ऑपरेशन प्रदेश अपने तरह का पहला ऑपरेशन है। एक शरीर दो जान और ऐसे में बद्किस्मती ने उस मां से उसकी अपनी एक नहीं दो जुड़वा लाड़ो को उससे अलग कर दिया था अब बीस जून के बाद आपरेशन उपरांत अपनी मां के आंचल में दुबकी हुई नजर आएगी। गरीबी और लाचारी के चलते उन दो शरीर से जुड़वा बच्चियों की देवकी को अपनी छाती पर पत्थर रख कर दान पत्र देकर पाढऱ चिकित्सालय को भाग्य के भरोसे छोड़ दिया था। अब इसे भाग्य का प्रारब्ध ही कहेंगे कि जब तक यह दोनों एक है तब तक मां की ममता के आंचल से कोसो दूरी रही लेकिन जैसे ही दोनों जुदा होंगी तो उन्हें फिर अपनी जन्म देने वाली मां का साया हासिल हो जाएगा। बैतूल जिला कलैक्टर एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री की संाझा नीति एवं रीति के चलते अब इन दोनो बच्चियों के दर्द का पूरा पाई - पाई का हिसाब - किताब चुकाने के बाद किसी अनाथ आश्रम या किसी अन्य की गोदी में खेलने के बजाय दोनो लाड़ली लक्ष्मियां अपनी मां के आचंल में ही रहेगी। बीते दस महीने से नेशनल हाइवे 69 पर स्थित ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित पाढर चिकित्सालय के आईसीयू वार्ड में भर्ती दो लाड़ली लक्ष्मियां आराधना और श्रुति जिनका ऑपरेशन विदेश से आने वाली डॉक्टरों की टीम द्वारा करने के बाद दोनो को एक दुसरे से अलग कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इन दोनों मासूमों का जन्म के चंद दिनों बाद ही अपनी मां का आंचल छूट गया था। दोनों बेटियों का शरीर एक दूसरे से चिपका हुआ था और इनके पिता चूडिया निवासी हरिराम यादव और उसकी पत्नी माया यादव ने अपनी मोह - माया - ममता का गला आर्थिक बदहाली की रस्सी से घोंट दिया था। क्योकि हरि और माया अपनी बेटियों का मंहगा ऑपरेशन का खर्चा नहीं उठा सकते थे इसलिए उन्होंने एक स्टाम्प पेपर पर अपनी सहमति से बच्चियों को चिकित्सायल को दान स्वरूप सौंपकर चले गए थे। प्रदेश सरकार के द्वारा पूरा ऑपरेशन एवं उसके पहले तथा बाद का खर्च वहन करने की जवाबदेही लेने के बाद बच्चियां पूरी तरह से स्वस्थ्य हो जाएगी। उसके बाद पाढऱ चिकित्सालय मुख्यमंत्री की पहल पर निश्चित रूप से इन बच्चियों को इनके अभिभावकों को सौंप देगें।


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